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3 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
हर बीज को जमी मिलेहवा, पानी, रोशनी मिलेविचारों को रोशनाई मिलेशाम को तनहाई मिलेहर पतंग को डोर थोड़ा औरआदमी में आदमी जोड थोड़ा और आगे पढ़ें...

मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना थाजिस्म से रूह पर अभी फिसला ही थाअभी देखा भी नही था उसे आंख भरकि धकेल दिया तुमने मुझे बाहर....मुझे तुझमे थोडी देर और रुकना था आगे पढ़ें...