वो हिस्सा अतीत का
जो पहाड़ी के उस तरफ लुढ़क कर
कभी गिर गया था खाई में
पकड़े हुआ था मुझे ,
जकड़े हुआ था मुझे भींच कर.
वहाँ से निकलने और ना निकलने की
जद्दोजहद में
मैं चढ़ा भी उस पहाड़ी पर
कभी फिसल कर और कभी जानबूझ कर
गिरा भी बहुत बार उस खाई में
पर आज चढ़ आया हूँ
उस पहाड़ी पर
और देख सकता हूँ
अपने अतीत को, और भविष्य की ओर
संभावनाओं पर
डाल सकता हूँ एक पूरी आँख
फ़िर शुक्रिया तुम्हें
तुमने आवाज़ दी आगे से
मुझे बताया कि
तुम सिर्फ अतीत में ही नही बल्कि
आगे भी हो और रहोगे हमेशा
शुक्रिया तुमने रस्सी फेंकी खाइ में
ताकि मैं पहाडी पे आ सकू फिर से
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