वो हिस्सा अतीत का जो पहाड़ी के उस तरफ लुढ़क कर कभी गिर गया था खाई में पकड़े हुआ था मुझे , जकड़े हुआ था मुझे भींच कर. वहाँ से निकलने और ना निकलने की जद्दोजहद में मैं चढ़ा भी उस पहाड़ी पर कभी फिसल कर और कभी जानबूझ कर गिरा भी बहुत बार उस खाई में पर आज चढ़ ...
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