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जुलाई 2008


ब्लॉग्स (19)
वो रिश्ते जिनके बीज ख्वाब में गिर कर हीं रह गये मेरी माटी नही छू पाए उन रिश्तों की पौध ऊग आई है आज मेरे सूने आंगन के एक कोने में मैं हाथ नही लगाता उनकी पाकीज़ा कोंपलों पे, डरता हूँ, अपने हक के बारे में सोंच कर. सिर्फ सुनने की कोशिश करता हूँ उन्हे हाथ में ... आगे पढ़ें...

यूँ हीं नहीयूँ हीं तो नही कभी भी कभी बैठा नही यूँ हीं और कभी चला भी नही सब कुछ किया मकसद से हमेशा चला उधर, जिधर लगा कि मंजिल है भागता रहा ख्वाब ख्वाब, परवाह नही की ख़ुरदुरी जमीन और ऊबड़ खाबड़ रास्तों की, सब तय किया जैसा भी जरूरी लगा उस वक़्त याद नही रखा- ... आगे पढ़ें...

मैं कृतग्य हूँ मैं कृतग्या हूँ उस जीवन के प्रति जो मुझमें और तमाम अन्य जीवों में लगातार साँसें ले रहा है मैं कृतग्य हूँ उस सूरज के प्रति जिसने ऊर्जा भेजने में कभी कोई चूक नही की और जिसके बिना अकल्पनीय थी हमारी सर्जना मैं कृतग्य हूँ उस प्रकृति के प्रति ... आगे पढ़ें...