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तेरे ख्वाब ने


कल रात भर करवटे बदली
शाम से ही समंदर बहुत रहा बेचैन

कई बार उठा बिस्तर से
कई बार हाथ पाँव धोये
टहला भी बालकनी में काफी देर तक
पानी निकाल कर पिया फ्रीज से

सब तरह के संघर्ष से गुजरा
पर लहरों को नींद नही आयी

कल की पूरी रात
हाँ पूरी एक रात
तेरे ख्वाब ने सोने ना दिया.


अस्वीकरण