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30 जून, 2008


ब्लॉग्स (1)
कल रात भर करवटे बदली शाम से ही समंदर बहुत रहा बेचैनकई बार उठा बिस्तर सेकई बार हाथ पाँव धोयेटहला भी बालकनी में काफी देर तकपानी निकाल कर पिया फ्रीज सेसब तरह के संघर्ष से गुजरापर लहरों को नींद नही आयीकल की पूरी रातहाँ पूरी एक राततेरे ख्वाब ने सोने ना दिया. आगे पढ़ें...