कडी धूप में जिंदगी तप रही है
मैने तेरे सारे छाव खो दिये हैं
बादल को मैने कहा था कभी
बूँदें तुझे एक दिन छोड़ देंगी
मुहव्वत की ताजी नजर से गिरी हो
कायनात को तुम डूबो के रहोगी
सबकुछ ही बिल्कुल हो जब सही
नाकाम लब्जे फिसल जाती हैं एन वक्त
जब छोड़ दिया उसने ख्वाबों में आना
हमने भी छोड़ दिया ख्वाबों में जाना
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