हालांकि, मैने छोड़ दिए हैं
देखने वे ख्वाब
पर,
मेरे कंधे पर
अभी भी आ टिकता है चेहरा तेरा
और मेरे सीने को जब तब घेर लेती हैं बाजुएं तुम्हारी
उन ख्वाबों में
मेरी कनपटियो से छूती हुई
अभी भी निकल जाती हैं तुम्हारी अलाव सी साँसे
जो कभी ठंढी नही होती और
जो फूंक देती है
फिर वही पुरानी हरकतें
मेरी साँसों में भी
अभी भी खुल जाती हैं तुम्हारी सलवटें
जहाँ पनाह भरा है
और वो मौन राते, जहाँ लब्जों के सिवाए
सब कुछ होता है.
अभी भी मैं तेरी सुबह थाम कर
शाम तक के लिए निश्चिंत हो जाता हूँ.
हालांकि मैने छोड़ दिए हैं देखने वे ख्वाब
फिर भी...
लोड हो रहा है...