Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

11 जून, 2008


ब्लॉग्स (2)
कडी धूप में जिंदगी तप रही हैमैने तेरे सारे छाव खो दिये हैंबादल को मैने कहा था कभीबूँदें तुझे एक दिन छोड़ देंगीमुहव्वत की ताजी नजर से गिरी होकायनात को तुम डूबो के रहोगी सबकुछ ही बिल्कुल हो जब सही नाकाम लब्जे फिसल जाती हैं एन वक्तजब छोड़ दिया उसने ख्वाबों ... आगे पढ़ें...

हालांकि, मैने छोड़ दिए हैं देखने वे ख्वाब पर, मेरे कंधे पर अभी भी आ टिकता है चेहरा तेरा और मेरे सीने को जब तब घेर लेती हैं बाजुएं तुम्हारी उन ख्वाबों मेंमेरी कनपटियो से छूती हुई अभी भी निकल जाती हैं तुम्हारी अलाव सी साँसे जो कभी ठंढी नही होती और जो फूंक ... आगे पढ़ें...