Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

सूखने की वजह

वो सूखा खड़ा था वहाँ,
जब दुबारा आगोश में भरा था उसने
फिर उसी पुरजोर कशिश के साथ.

कुछ बरस पहले वो हरा था
और ऐसी घनी छाँव थी उसकी
कि गुजरते हुए कोई भी रूक जाता था वहाँ

फिर छूटती गयी थी हरियाली
गिरती गयी थी पत्तियाँ एक एक कर.

उसने बाहें ढीली कर दिन थी दरअसल.

अब फिर आ जाएंगी वो हरियाली, वो पत्तियाँ और वो छाँव.

अस्वीकरण