जरा सा रह गया है
नदियों में पानी
उसी के लिए
चल रही है मारा-मारी .
जरा सी रह गयी है
पुरानी घनी छाँव
उनपे भी जल्दी हीं
चलने वाली है कुल्हाड़ी
जरा सी रह गयी है
फ़िज़ा में नरम, ताजी हवा
जो सबसे तेज दौड़ पाएंगे
वही सांस ले पाएंगे.
जरा सी बच गयी है
मौसमों में जान
जैसे कोयल की तान, पपीहे का गान.
पहले हीं जा चुके हैं कुछ
कुछ कर रहे हैं उड़ने कि तैयारी.
आइए हम भी बांधे
अपना बोरा-विस्तर
और करे चलने कि तैयारी
क्यूँ कि अब हमारी हीं है बारी.
जरा सा रह गया है वक्त
है ना?

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