जैसे आप खो गये हों कहीं
मान लो, किसी अनजाने ग्रह पे
आप सा वहाँ कोई नही
आपकी आवाज़ कोई पहचानता नही
आपकी बोली में कोई बोलता नही
कोई अपना सा खोजते खोजते आपका दम टूटने लगा हो
पुकारते पुकारते आपके कंठ सूख रहे हो
और आप बदहवास से
भागते हुए ढूंढ रहें हो इधर-उधर कि
कोई तो अपना मिले.
आज तीन चार दिन से एक कोयल को
इस जून के महीने में, देख रहा हूँ
अकेले बोलते हुए
ना कोई जवाब देने वाला है, ना सुनने वाला.
सोंचा
आपको भी बता दूँ.

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