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2 जून, 2008


ब्लॉग्स (1)
रूह के साथजरा सा भी रोमांसजारी नही है अब.जाने कैसेदेह की मांगे बढती हुईयहाँ तक पहूंच गयीकि सारी रूह मिट गयीपूर्ति में ही.ना प्रार्थना साफ रहीना प्रेम सफेदऔर ना ध्यान शांत हर तरफ आवाजें हैं बाजार कीऔर चीजेंजिसमें से छांटो तो जरा सा सूकून भी नही निकलता.किस ... आगे पढ़ें...