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30 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
धूप में पड़े रहे वो.पह्ले रंग उतरे उनकेऔर फिर धीरे - धीरे उनकी चिद्दिया उड़ती चली गयी छाव खींच कर वेआशियाना बना लिये होते, गरएक ने दूसरे की जिद मान ली होतीमगर वे अड़े रहेन छाव खींची, न जिद अपनीपड़े रहे वे धूप में चिद्दिया उड़ने तक.जाने क्यू, जाने कैसे! आगे पढ़ें...