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26 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
समय घिस-घिस कर फटता रहाऔर हम उनपे पैबंद लगाते रहेकुछ यूँ ही गुजरी जिंदगी हमारीहालात तो हमने ढक दिये पैबंदो सेपर पैबंदो को हम नही ढक पाये. आगे पढ़ें...