इस लड़खड़ाती रात में
उसकी यादों की उंगली थामे चल रहा हूँ
उसकी यादों का जिंदा वजूद
मेरे हर गिरते पल को थाम लेता है
याद में ये राहें इतनी व्यस्त नही हैं
वहाँ प्यार से चलने के लिये जगह भी है और वक़्त भी
उन पर जरा बेफिक्र हो कर चला जा सकता है
याद में उसकी लबे हैं पंखुडी जैसी
जहाँ गुलाब महकता है
एक लहर है नजरों में
जिस पर समंदर बहकता है
यादो में ही रहना हो रहा है आजकल
यादो में सुकून है जरा.

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प्रतिसाद