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12 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
तेरे जलबो में डूबता हूँ रोज तेरे जलबो की गहराई बहुत है. तेरे लम्हों का हाथ छूट गया जबसे मेरी दुनिया में तनहाई बहुत है. तुम मुड़ जाओगे ये मालूम था मुझको साथ चलने को तेरी यादों की पडछाई बहुत है तेरे कदमो में सर रखना है मुझे क्या करूं पर, तेरे कदमो की ऊँचाई ... आगे पढ़ें...