Web Webdunia.com ओम आर्य
Webdunia Portal |  Greetings |  Classifieds |  E-mail |  Take A Tour |  Font Download |  Feedback
X
Welcome, Guest  [ Portal's List |  Create Portal |  Sign In ]
 लोड हो रहा है...

• लावा साँसे

छोटी सी इक छूअन
धीमे से
तुम्हारी उंगलियों में फँसाया था कभी
वो भी ख्वाब में
और कैसे धौंकनी हो गयी थी तुम्हारी साँसे

पीछे दीवार से टिका कर तेरी पीठ
मैने देनी चाही थी तुम्हें
अपनी लावा साँसे
याद है? पर तुमसे सहेजा ना गया था
तुम अकबका कर चली गयी थी
ख्वाब से.
जैसे कि जल जाओगी.

आज फिर देखा है तुम्हे
वही ख्वाब है
पर आज तुमने अपने गर्दन पे मेरे लब आने दिये.

कुछ रिश्ते ख्वाब में ही आगे बढ़ते हैं.
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान