हमने अपने दिल ही नही कुरेदे. ये सोंच कर कि हवा, पानी, रोशनी रोक ली जाएगी, बीज हमने दबाए ही नही माटी में और रोक दी सम्भावना किसी खूबसूरत रचना की. तब ख्वाब में उगे वे बीज वहाँ वे खिले,लहलहाए और मुस्कुराये खूब खुशबूएं बिखेरीवे बाहर भी आयी उनके पोरों से बाहर ...
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