तुझे देख कर ख्वाब में, रात सोया था मैं कल रातकल रात नींद आयी थी.आज जागने की तबीयत ही नही हुई गरम रहे तकिए, गद्दे और विस्तर सुबह तकगरम रहे मेरे कान पिघल कर बहती रही आरजुए देर तकतुझे देख कर ख्वाब मेंएक और वैसे ही ख्वाब के इंतिज़ार मेंजागा ही नही आज बडी देर ...
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