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मई 2008

 

• वो आवाजें

मैं अपना नाम लेकरउसे आवाज देता रहाउसने मेरा नाम न अपने कानो पे रखाऔर ना ही लबो पे आने दियातडपती रही वो आवाजें मैं अनसुना ही रहा और वो अनकही ही   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• याद में

इस लड़खड़ाती रात मेंउसकी यादों की उंगली थामे चल रहा हूँउसकी यादों का जिंदा वजूदमेरे हर गिरते पल को थाम लेता हैयाद में ये राहें इतनी व्यस्त नही हैंवहाँ प्यार से चलने के लिये जगह भी है और वक़्त भीउन पर जरा बेफिक्र हो कर चला जा सकता हैयाद में उसकी लबे हैं ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: तेरे साहिल पर
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• तेरे जलबो में

तेरे जलबो में डूबता हूँ रोज तेरे जलबो की गहराई बहुत है. तेरे लम्हों का हाथ छूट गया जबसे मेरी दुनिया में तनहाई बहुत है. तुम मुड़ जाओगे ये मालूम था मुझको साथ चलने को तेरी यादों की पडछाई बहुत है तेरे कदमो में सर रखना है मुझे क्या करूं पर, तेरे कदमो की ऊँचाई ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: ग़जल
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• लावा साँसे

छोटी सी इक छूअन धीमे से तुम्हारी उंगलियों में फँसाया था कभी वो भी ख्वाब में और कैसे धौंकनी हो गयी थी तुम्हारी साँसे पीछे दीवार से टिका कर तेरी पीठ मैने देनी चाही थी तुम्हें अपनी लावा साँसे याद है? पर तुमसे सहेजा ना गया था तुम अकबका कर चली गयी थी ख्वाब ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• बाल्टी भर-भर जिंदगी फेंकी !

रात गर्म थी हवालू के थपेड़े उड़ रहे थे हर तरफ आंधी सा हाल था इतनी धूल उड़ी कि इंसानियत ने बंद कर ली आँखें अंधेरा कसा रहा चप्पे चप्पे पे. काले आसमान से एक तारा भी नही निकला जो टिम-टीमा दे जरा देर के लिए भी. सुबह सफाई वाले ने बाल्टी भर-भर जिंदगी फेंकी.   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• बीज

हमने अपने दिल ही नही कुरेदे. ये सोंच कर कि हवा, पानी, रोशनी रोक ली जाएगी, बीज हमने दबाए ही नही माटी में और रोक दी सम्भावना किसी खूबसूरत रचना की. तब ख्वाब में उगे वे बीज वहाँ वे खिले,लहलहाए और मुस्कुराये खूब खुशबूएं बिखेरीवे बाहर भी आयी उनके पोरों से बाहर ...   और पढ़ें...
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• इश्क में

रिश्ते घने हो जाते हैं जबकोहरे की तरह,तो इश्क हो जाते हैंतभी तो दिखाई नही देता कुछ भी इश्क में.   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• कुछ कच्ची नज़्में

कच्ची रह गयी कुछ नज़्में इस बार भी आम के मौसम में अभी और बड़े होने थे पकने थे, और खूशबुएं आनी थी उनमे से पर तेज अंधर आए और झाड़ गये डालियां जिसके हाथ जो लगा वही लूट ले गया हर साल लूटी जाती हैं कुछ कच्ची नज़्में   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• दोहरी तनहाई में

एक तो अपनी ...और दूसरी तुम्हारी...दोहरी तनहाई में जीता हूँ रोजशायद तुम भी जीती होगी कुछ इस तरह हीरोज शाम वे दोनो ही मिल जाती हैंसमंदर के साहिल के समानांतर बैठी हुईतुम्हे भी दिखाई दे ही जाती होगी कभी शायदवे रहती हैं सूरज डूबने तक वहींमैं लौट आता हूँ उन्हें ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• जुम्बिश

तुझे देख कर ख्वाब में, रात सोया था मैं कल रातकल रात नींद आयी थी.आज जागने की तबीयत ही नही हुई गरम रहे तकिए, गद्दे और विस्तर सुबह तकगरम रहे मेरे कान पिघल कर बहती रही आरजुए देर तकतुझे देख कर ख्वाब मेंएक और वैसे ही ख्वाब के इंतिज़ार मेंजागा ही नही आज बडी देर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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