धूप में पड़े रहे वो.पह्ले रंग उतरे उनकेऔर फिर धीरे - धीरे उनकी चिद्दिया उड़ती चली गयी छाव खींच कर वेआशियाना बना लिये होते, गरएक ने दूसरे की जिद मान ली होतीमगर वे अड़े रहेन छाव खींची, न जिद अपनीपड़े रहे वे धूप में चिद्दिया उड़ने तक.जाने क्यू, जाने कैसे!
आगे पढ़ें...