कुछ फ़ासले पर कोहरा है थोड़ा
जिसके उस पार जाने की लगातार कोशिश कर रहा है
एक एहसास
पर चीर कर पहुँच नही पा रहा.
जज्बों में धूप शायद उतनी तेज नही
कोहरे के उस पार
जीवन
दरवाजे के पल्ले भिडाये
कमर तक रजाईया लपेटे
इंतेज़ार कर रहा है किसी खटखटाहट का
दरअसल, उसी एहसास के दस्तक का.
सब कुछ कितना आसान सा है
पर नही मालूम क्यूँ
कुछ कोशिशें बिना कामयाब हुए बगैर रह जाती हैं,
या फिर कामयाब होने में बहुत वक़्त लगता है.

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