तेरे जलबो में डूबता हूँ रोज
तेरे जलबो की गहराई बहूत है
तेरे लम्हो का साथ छूट गया जबसे
मेरी दुनिया में तनहाई बहूत है
तेरे कदमो में सिर रखना है मुझे
क्या करू पर, तेरे कदमो की ऊंचाई बहूत है
तुम मुड जाओगे किसी मोड पे, ये मालूम था मुझको
साथ चलने को तेरे यादो की पडछाई बहूत है
रात सपने में आते रहे तुम टूकडा-टूकडा,
सुबह् से बदन में अंगडाई बहूत है
तेरे लम्स ओढ लेता हूँ सर्द रातो में
तेरे छूअन में गरमाई बहूत है
तेरी बाते लहू ऊबालती है ओम
तेरे बातो में सच्चाई बहूत है.

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