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14 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
तेरे जलबो में डूबता हूँ रोजतेरे जलबो की गहराई बहूत हैतेरे लम्हो का साथ छूट गया जबसेमेरी दुनिया में तनहाई बहूत हैतेरे कदमो में सिर रखना है मुझेक्या करू पर, तेरे कदमो की ऊंचाई बहूत हैतुम मुड जाओगे किसी मोड पे, ये मालूम था मुझकोसाथ चलने को तेरे यादो की पडछाई ... और पढ़ें...

वहीं पे है पडा अभी तक वो जाम साकीनिकल आया तेरे मयखाने से ये बदनाम साकीनजर में ठहरी हुई है वो तेरी महफिल अभी तकजो पी आया तेरे होठो से एक कलाम साकीहो न जाये ये परिंदा कोई गुलाम कहते हैं शहर में बिछे हैं पिंजडे तमाम साकीमुझे मालूम है मेरी गुमनामी के बारे ... और पढ़ें...