वहीं पे है पडा अभी तक वो जाम साकीनिकल आया तेरे मयखाने से ये बदनाम साकीनजर में ठहरी हुई है वो तेरी महफिल अभी तकजो पी आया तेरे होठो से एक कलाम साकीहो न जाये ये परिंदा कोई गुलाम कहते हैं शहर में बिछे हैं पिंजडे तमाम साकीमुझे मालूम है मेरी गुमनामी के बारे ...
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