गुजरता रहेगा वक़्त पहले की तरह
पर मौसम टंगे रहेंगे उन्ही सुखे पत्तों पर
आर पार जाती रहेंगी झोंके बारिशो के
लहू के तपिश और दबाब कम नही होंगे
पसरती रहेगी धूप छत और आंगन के कंधों पर
पर छू नही पायेगी उनकी छूअन सीलनो और दीमको को
बहुत सारा पानी बह गया होगा तब तक
पर रक्त टिका रहेगा जहाँ कटे थे रिश्ते
लिखी जाने वाली किताबें
तेरे किरदार के इंतज़ार में बैठी रहेंगी
तेरे लौटने तक सब कुछ टंगा रहेगा
मेरे साथ दरवाजे के पीछे कुंडी पर

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