लिबास के साथ
मैं चलता गया था उसकी तरफ
निरंतर
दूरी कितनी तय हुई मालूम नही
रास्ते में मै कही ठहरा नही जिस्म पर
और वो भी रूह से पहले तक दिखायी नही दी एक बार भी
छूना चाहा जैसे ही दिखी पर
अचानक अद्र्श्य हो गयी हाथ बढाते ही
तब लगा मैं
लिबास साथ लिये आ गया था
कोई लिबास के साथ उसे
रूह में छू नही सकता

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