मैं चलता गया था उसकी तरफनिरंतरदूरी कितनी तय हुई मालूम नहीरास्ते में मै कही ठहरा नही जिस्म परऔर वो भी रूह से पहले तक दिखायी नही दी एक बार भीछूना चाहा जैसे ही दिखी परअचानक अद्र्श्य हो गयी हाथ बढाते हीतब लगा मैंलिबास साथ लिये आ गया थाकोई लिबास के साथ उसेरूह ...
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