खिला करती हो गमले की मिट्टियो में
लिहाफ है प्यार तेरा
ओढ के लेटता हूँ सर्दियो में
नजरो में तेरी यादो के पन्ने हैं
पलट के पढा करता हूँ छुट्टियो में
जब मौसम सन्वरता है
खिला करती हो गमले की मिट्टियो में
गुनगुनी धूप में छत पे बैठती हो
और पीपल के नीचे गर्मियो में
तेरी दूरी ने खराशे बनायी रेत पे
और खरोंचे मेरी हड्डियो में

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