चील से उडते हैं मौसमजैसे झपट्टा मारने को होअलसायी पडी जिंदगी सुखती रहती है टहनी पेजम्हाई लेती दुपहरी के रोशनदानो से झुलसी हुई हवा का आना लगा रहता हैदीवारे तपती रहती है अल्लसुबह सेभीतर ही भीतरधाह मारती रहती हैभिंगोता हूँ, पानी छिडकता हूँ पर धूल थमती ...
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