एक डगमगाता हुआ विश्वास
टूट कर
बिखर जाने के लिये
है जैसे एकदम तैयार
एक ऊबलती हुइ सनसनी
फैल जाने के लिये
है एकदम बेताब
छोटी छोटी नाकामिओ पर
एक क्रोध
गेहूअन की लिबलिबी पर
आपे से बाहर होता हुआ
हरदम
एक साजिश
रची जाने के लिये
है एक दम उतावली
एक आशंका
हकीकत में तब्दील होने के लिये
है एकदम बौखलायी हुई
दया, प्रेम, मुस्कान
करूणा
सब नियत और नियंत्रित
दिखावे से जरा भी ज्यादा नही
एक उम्मीद राह से बार बार लौट कर आती हुई
एक तलाश लडख़डाती जाती हुई
एक सांस ढलान से नीचे जाती हुई
और एक अफसोस निर्लज्ज होता हुआ
यही सब कुछ रह गया है जिंदगी में
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