तुझे देखा है कई बार ख्वाब मेंसोचता हूँ कोई शेर लिखू तेरे किताब मेंबडी देर तक आंखे रही बेचैनजो छिपा लिया तुने चेहरा हिजाब मेंजाने कब तक लहरे रक्श करती रहीजाने किसने मिला दी समंदर शराब मेंतुमने तो खोल दी अनजाने ही में आंखो की धार कोतुम्हे क्या पता कौन बह ...
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