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अप्रैल 2008


ब्लॉग्स (20)
बडे करीब हैं दिल के .....धान के खेतो के बगल से जाती हुई पगडंडीयाजहाँ छाव होती है मोड पे बरगद कीआम के बगीचे में खाट पडी हो कोईगरमी के दुपहरियो को मुंडेर से बंधे हो झुलेऔर ऐसी ही कुछ और चीजे बहुत करीब हैं दिल केक्यो नही होंगीये सारी चीजे पसंद जो थी तुम्हें आगे पढ़ें...

तुझे देखा है कई बार ख्वाब मेंसोचता हूँ कोई शेर लिखू तेरे किताब मेंबडी देर तक आंखे रही बेचैनजो छिपा लिया तुने चेहरा हिजाब मेंजाने कब तक लहरे रक्श करती रहीजाने किसने मिला दी समंदर शराब मेंतुमने तो खोल दी अनजाने ही में आंखो की धार कोतुम्हे क्या पता कौन बह ... आगे पढ़ें...

शामें ढल जाया करती हैं तेरे बगैर अक्सर, अक्सर ही तेरे बगैर !जो ढल जाया करती हैं शामें तेरे बगैर मत पूछो कि उन शामो की रातों का क्या होता है कैसे नीली पड़ी रहती है उसकी देह जैसे कोई जख्म उभरते उभरते रह गया हो भीतर का दर्द बाहर न आ पाया हो जैसेजैसे बिस्तर ... आगे पढ़ें...