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अप्रैल 2008

 

• बडे करीब हैं दिल के .....

बडे करीब हैं दिल के .....धान के खेतो के बगल से जाती हुई पगडंडीयाजहाँ छाव होती है मोड पे बरगद कीआम के बगीचे में खाट पडी हो कोईगरमी के दुपहरियो को मुंडेर से बंधे हो झुलेऔर ऐसी ही कुछ और चीजे बहुत करीब हैं दिल केक्यो नही होंगीये सारी चीजे पसंद जो थी तुम्हें   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• तुझे देखा है कई बार ख्वाब में

तुझे देखा है कई बार ख्वाब मेंसोचता हूँ कोई शेर लिखू तेरे किताब मेंबडी देर तक आंखे रही बेचैनजो छिपा लिया तुने चेहरा हिजाब मेंजाने कब तक लहरे रक्श करती रहीजाने किसने मिला दी समंदर शराब मेंतुमने तो खोल दी अनजाने ही में आंखो की धार कोतुम्हे क्या पता कौन बह ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: ग़जल
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• तेरे बगैर अक्सर

शामें ढल जाया करती हैं तेरे बगैर अक्सर, अक्सर ही तेरे बगैर !जो ढल जाया करती हैं शामें तेरे बगैर मत पूछो कि उन शामो की रातों का क्या होता है कैसे नीली पड़ी रहती है उसकी देह जैसे कोई जख्म उभरते उभरते रह गया हो भीतर का दर्द बाहर न आ पाया हो जैसेजैसे बिस्तर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• अपने बिके देह में

आज फिर बेच दिए नींद की कतरने हमनेआज फिर बाजार की चढ़ती-उतरती दामो के साथ बाँध दिया खुद को. आज फिर अपने बिके देह में रहना होगा मुझे आज फिर रूह कर्ज से होकर गुज़रेगी   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• नाकामयाब कोशिशें

कुछ फ़ासले पर कोहरा है थोड़ा जिसके उस पार जाने की लगातार कोशिश कर रहा है एक एहसास पर चीर कर पहुँच नही पा रहा. जज्बों में धूप शायद उतनी तेज नही कोहरे के उस पार जीवन दरवाजे के पल्ले भिडाये कमर तक रजाईया लपेटे इंतेज़ार कर रहा है किसी खटखटाहट का दरअसल, उसी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• कुछ नज़्में

कुछ ग़ज़लें, कुछ नज़्में जो उलझ जाती है मकड़जाल में कुछ बातें, जिन्हे लम्हों की तनी रस्सियों पर चलना होता है कुछ एहसास और खयाल जो पिघलते नही किसी भी मौसम में कुछ चित्र और रंग जिनको आँख में आने की वजह नही मिलती -----और इस तरह की कुछ और भी चीजें जो अधूरी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• मैं, आप, सब....

साहिल समंदर के बाजू में बैठा लहरों का इंतेज़ार करता रहता है समंदर चाँद को छूने की आजमाइश में किनारे पे बौछार करता रहता है चाँद रात की मलमली विस्तर पे रौशनी का मनुहार करता रहता है उजाला कायनात के जर्रे-जर्रे में जा कर अंधेरे को प्यार करता रहता है तमस हर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• साकी... (2)

तू किनारे पे करना इंतेज़ार साकी मैं लौटूँगा फिर इस पार साकी बिक जाएंगे एक दिन कौडियो में सब तब भी बच जाएंगे ये बाजार साकी अरसे से महरूम रखा आँसुओं से आँखों का हूँ बड़ा मैं गुनहगार साकी तेरे घर का दरवाजा हर दफ़ा बंद मिला हम गुजरे तो तेरी गली से कई बार ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: ग़जल
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• दरख्त के बारे में

सालों साल तक सुखता रहा दरख्तमगर बूँदों को बरसने का खयाल नही आयाजाने दरिया कैसा सख्त रहा होगाउमड़ नही पाया होगा जो इतने लम्बे अरसे तकदरख्त को अकेला सूखता देखकर भीपहले पत्ते छुटे हाथ सेफिर एक एक कर छुटी टहनियाचमड़ी भी उधडी फिरऔर दरारें भी पडी आखिर में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• तेरे जलबो में

तेरे जलबो में डूबता हूँ रोजतेरे जलबो की गहराई बहूत हैतेरे लम्हो का साथ छूट गया जबसेमेरी दुनिया में तनहाई बहूत हैतेरे कदमो में सिर रखना है मुझेक्या करू पर, तेरे कदमो की ऊंचाई बहूत हैतुम मुड जाओगे किसी मोड पे, ये मालूम था मुझकोसाथ चलने को तेरे यादो की पडछाई ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• साकी...(1)

वहीं पे है पडा अभी तक वो जाम साकीनिकल आया तेरे मयखाने से ये बदनाम साकीनजर में ठहरी हुई है वो तेरी महफिल अभी तकजो पी आया तेरे होठो से एक कलाम साकीहो न जाये ये परिंदा कोई गुलाम कहते हैं शहर में बिछे हैं पिंजडे तमाम साकीमुझे मालूम है मेरी गुमनामी के बारे ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: ग़जल
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• पर रिहाई नही देते दर्द

ऐसा नही है कि चाहा नही जाता कभीकुछ ऐसा लिखने के बारे मेंजिसमें खुशियों की खूशबू आती और महकती रहेजिसमें लबो पे मुस्कान लहलहाते रहेंमौसमों पे बहार लदे से लगेंऔर ऐसी ही तमाम चीजें .....और ऐसा भी नही है कि सिर्फ चाहा ही जाता हैकोशिश नही की जातीऔर जानबूझकर कर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• टंगे रहेंगे

गुजरता रहेगा वक़्त पहले की तरहपर मौसम टंगे रहेंगे उन्ही सुखे पत्तों परआर पार जाती रहेंगी झोंके बारिशो केलहू के तपिश और दबाब कम नही होंगे पसरती रहेगी धूप छत और आंगन के कंधों परपर छू नही पायेगी उनकी छूअन सीलनो और दीमको कोबहुत सारा पानी बह गया होगा तब तकपर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: शायद इसे हाइकू ...
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• लिबास के साथ

मैं चलता गया था उसकी तरफनिरंतरदूरी कितनी तय हुई मालूम नहीरास्ते में मै कही ठहरा नही जिस्म परऔर वो भी रूह से पहले तक दिखायी नही दी एक बार भीछूना चाहा जैसे ही दिखी परअचानक अद्र्श्य हो गयी हाथ बढाते हीतब लगा मैंलिबास साथ लिये आ गया थाकोई लिबास के साथ उसेरूह ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• प्रतीक्षा

बहूत टटोली, पर खाली हाथ रहेह्थेली में हाथ नही आयेटूंगती रही वक़्त की शाख नजरपीठ पे ख्वाब लादे चलते रहे नींदसालो सालफटी, उघडी हुई देह में, जीते हुएऔरतुम्हारे आने केआस के आंच को तापते हुएमैं उस किनारे पे लगी रहीजहा से तेरी धार गुजरनी थी   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• ठहर गया कुछ सोंच कर

तार का वो सिरा तेरे हाथो से छूट गयातुम्हे देखना पडा उस तरफ और तुम्हारी पीठ धीरे से मेरी आंखो में धूंधली हो गयी और पीठ के साथ साथ जिंदगी भीफिर कई कोशिशें कीकई दिशाओं से देखा पर जिंदगी साफ दिखायी नही पडी ठहरी रही वही कोहरे में तार का एक सिरा पकडेजिसका ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• बडा इंतज़ार रहता है

दिल से चले गये दर्दो काजाने क्यो बडा इंतज़ार रहता हैऔर जो बच गये हैं बैठे हैं जाम लेकेहोश इनको जरा ना-गवार रहता हैआजकल अखबार का समाचार पढते वक़्तनजर बडा ही शर्मसार रहता हैबदन के रेशे रेशे पे जिंदा हर पलतेरे बोसे का प्यार रहता हैसमंदर ने छोड दिया आना साहिल ...   और पढ़ें...
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• जिंदगी नम नही

चील से उडते हैं मौसमजैसे झपट्टा मारने को होअलसायी पडी जिंदगी सुखती रहती है टहनी पेजम्हाई लेती दुपहरी के रोशनदानो से झुलसी हुई हवा का आना लगा रहता हैदीवारे तपती रहती है अल्लसुबह सेभीतर ही भीतरधाह मारती रहती हैभिंगोता हूँ, पानी छिडकता हूँ पर धूल थमती ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• खिला करती हो गमले की मिट्टियो में

लिहाफ है प्यार तेराओढ के लेटता हूँ सर्दियो मेंनजरो में तेरी यादो के पन्ने हैंपलट के पढा करता हूँ छुट्टियो मेंजब मौसम सन्वरता है खिला करती हो गमले की मिट्टियो मेंगुनगुनी धूप में छत पे बैठती होऔर पीपल के नीचे गर्मियो मेंतेरी दूरी ने खराशे बनायी रेत पेऔर ...   और पढ़ें...
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• टूटा हुआ

एक डगमगाता हुआ विश्वासटूट कर बिखर जाने के लियेहै जैसे एकदम तैयारएक ऊबलती हुइ सनसनीफैल जाने के लिये है एकदम बेताबछोटी छोटी नाकामिओ परएक क्रोध गेहूअन की लिबलिबी परआपे से बाहर होता हुआहरदमएक साजिशरची जाने के लियेहै एक दम उतावलीएक आशंकाहकीकत में तब्दील होने ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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