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25 मार्च, 2008

 

• जो मेरे हाथ अपने हाथ में आने दिये

राह में पूरी हुई तलाश मंजिल कीमिल गयी तेरी उँगलियाँ थाम कर चलने के लिये मंजिल या ठिकाने में और क्या होता हैइस एहसास के अलावा किकोइ है जोगर कभी लम्हे लडखडाये तो थाम लेंगेकि कोई है जिसके कांधे पे वजूद टिकाया जा सकता हैजिसकी हथेली में थमाया जा सकता है अपना ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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