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24 मार्च, 2008

 

• मेरे रंग रखना सहेज कर

दरवाजे रंग लिये खडी रहींतुम्हारे पाँव देहली तक फिर लौट कर नही आयेमेरे आधे रंग अभी भी यूँ ही पडे हैंशुक्र है कुछ तुम साथ ले गयी थी चौखटो ने रंग धोये नही शाम तक इंतिज़ार किया तेरी आहटो का हालांकि वे जानती थी कि तुम्हारा आ पाना होगा असंभव सातुम्हारी पैरों में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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