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वे नही आयेंगी

वो शाम का किनारा
जिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया था
और जिंदगी की सारी लहरें
गुम हो गयी थी उसके धुंधलके में

उसी किनारे पे सारी ख्वाहिशे टूट कर बिखर गयी थी
और मैं लौट आया था

पूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया फिर
जिंदगी के कारखाने में
पेट हथेली पे लिये घूमता रहा

मुझे याद भी आयी बहुत बार वो
टूट कर बिखरी हुई ख्वाहिशे
और मैं भूला भी बहुत बार
यात्रा के दौरान

पर जब कभी रूह को फुरसत मिली जिस्म से
पलट कर देखा जरूर उस किनारे को
जिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया था
और तुम्हारी लहरें गुम हो गयी थी धुंधलके में

आज भी देख रहा हूँ
वे बिखरी पडी है आज भी वही

मैं समेटता नही
आवाज भी नही देता
ये जानता हूँ कि वे नही आयेंगी.
अस्वीकरण