वो शाम का किनाराजिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया थाऔर जिंदगी की सारी लहरें गुम हो गयी थी उसके धुंधलके में उसी किनारे पे सारी ख्वाहिशे टूट कर बिखर गयी थीऔर मैं लौट आया थापूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया फिरजिंदगी के कारखाने मेंपेट हथेली पे लिये घूमता ...
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