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13 मार्च, 2008

 

• फिर मिल जाता है आसमान

फिर मिल जाता है आसमानजब परिंदो में उडान लौट आती है कल रात कुछ ऐसा ही हुआथका सा एक साख पे वो बैठा थाजब छू गयी कोइ संजीवनी हवापरो पे ताजे कुछ जोश उभर आए और वो उड चलाऔर परो पे फिर से वही उडान लौट आयीउसके सामने अब फिर से एक पूरा आसमान हैउस संजीवनी हवा में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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