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मार्च 2008

 

• कहानी को जरा फिर से बुनना है

कहानी को जरा फिर से बुनना हैकहानी की एक अच्छी शुरूआत होनी ही चाहियेताकि सुनने सुनाने में अच्छी लगेकाट्- छांट कर अलग करना हैउलटी पुलटी चीजो कोसंडे, गंधाते हिस्सो कोजो फालतू में जगह घेरती है कहानी मेंऔर प्रस्तुति को भद्दा बनाती हैकुछ शब्दो में जान फूंकनी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• जो मेरे हाथ अपने हाथ में आने दिये

राह में पूरी हुई तलाश मंजिल कीमिल गयी तेरी उँगलियाँ थाम कर चलने के लिये मंजिल या ठिकाने में और क्या होता हैइस एहसास के अलावा किकोइ है जोगर कभी लम्हे लडखडाये तो थाम लेंगेकि कोई है जिसके कांधे पे वजूद टिकाया जा सकता हैजिसकी हथेली में थमाया जा सकता है अपना ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• मेरे रंग रखना सहेज कर

दरवाजे रंग लिये खडी रहींतुम्हारे पाँव देहली तक फिर लौट कर नही आयेमेरे आधे रंग अभी भी यूँ ही पडे हैंशुक्र है कुछ तुम साथ ले गयी थी चौखटो ने रंग धोये नही शाम तक इंतिज़ार किया तेरी आहटो का हालांकि वे जानती थी कि तुम्हारा आ पाना होगा असंभव सातुम्हारी पैरों में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• वे नही आयेंगी

वो शाम का किनाराजिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया थाऔर जिंदगी की सारी लहरें गुम हो गयी थी उसके धुंधलके में उसी किनारे पे सारी ख्वाहिशे टूट कर बिखर गयी थीऔर मैं लौट आया थापूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया फिरजिंदगी के कारखाने मेंपेट हथेली पे लिये घूमता ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: तेरे साहिल पर
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• पा लो मुझे !!!

तमन्ना हैकि पा लिया जाऊँऔरइंतिज़ार जारी है इसके लिये लगातारखोया हुआ हूँ अरसे सेदिखाई और सुनायी देने की संभावना से परे रिक्त हूँ बिल्कुल बिना किसी केखाली हो गया था किसी समय किसी जगह और फिर भरा नही गया कभीदेखे तेरी आँखें, तेरी खूबसूरत आंखे मेरा पुनर्जन्म ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• अधूरी सम्वेदनाये

जहाँ तक देखना हो पाता है दिख जाती हैं वेदनाये बिखरी पडी हुईंगोल, चौकोर या लम्बोतरे चेहरे में कभी सडक के किनारेया रेल्वे प्लैट्फार्म परकचरा घर के आस - पास चाहरदीवारी के बाजू मेंघर के कोनों अंतरों में दराजो के नीचेदरवाजो के पीछे कई बार पुछता हूँ उनसेवे ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• जो बह गये पानी

बजायी गयी   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• हर तरफ शहर जेहन में

वे कहीं छूट गये सफर के दौरान कभी हम खुद ही उन्हें कहीं छोड आयेकभी जब वे छूटने लगे तो हम जान ही नही पायेकभी उनको जाते देखकर रोक नही पायेकभी अपने गुमान में हमने बुलाया ही नहीये तमाम बातें हुईंजिसके फलस्वरूप वे नहीं हैं साथ आजलबालब भरा है हर तरफ शहर , ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• फिर मिल जाता है आसमान

फिर मिल जाता है आसमानजब परिंदो में उडान लौट आती है कल रात कुछ ऐसा ही हुआथका सा एक साख पे वो बैठा थाजब छू गयी कोइ संजीवनी हवापरो पे ताजे कुछ जोश उभर आए और वो उड चलाऔर परो पे फिर से वही उडान लौट आयीउसके सामने अब फिर से एक पूरा आसमान हैउस संजीवनी हवा में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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