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• एक नकारात्मक कविता

एक लम्बा अरसा हुआ
एक हल्की सी उम्मीद और
एकाध मुस्कराहट के साथ
वक़्त फांकते हुए

धूल चटाने के हौसले खुद मिट्टी होने को हैं

आवाज उठाने वाले सिर महज
सिर हिलाने वाले न बन जाये
ये डर है

मुठ्ठियो में कसाव की जगह
प्रार्थना लेने लगी है

बाजुओ में वो पहले से पंजे नही रहे

दिल में ये एहसास धीरे धीरे बैठ रहा है
कि
एक दिन बदल जाता है आदमी ही
और दुनिया जस की तस बनी रहती है
चलती रहती है
ताकत्, अन्याय और शोषण के पहियों पर
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान

 प्रतिसाद

Re: एक नकारात्मक कविता
सुंदर कविता...."उदास हो गई एक फ़ाख़्ता चहकती हुई, किसी ने कत्ल किया है, ये इंतकाल नहीं."