एक लम्बा अरसा हुआएक हल्की सी उम्मीद और एकाध मुस्कराहट के साथ वक़्त फांकते हुएधूल चटाने के हौसले खुद मिट्टी होने को हैंआवाज उठाने वाले सिर महजसिर हिलाने वाले न बन जायेये डर हैमुठ्ठियो में कसाव की जगहप्रार्थना लेने लगी हैबाजुओ में वो पहले से पंजे नही रहेदिल ...
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