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26 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
. ताल्लुकात सिमटते गयेधीरे - धीरे किताब के किरदारो से खुद से मिलता जुलता, कोइ मामुली साया कोइ हैरत अंगेज सा किरदारमिल जाया करते थे अक्सरकिताब के पन्नो मेंवे किरदार जीवित हैं आज भीऔर वक़्त-बेवक़्त मिल जाया करते हैकिसी सहारे की तरहऔर उंगली थाम कर चलने लगते ... और पढ़ें...