उसने कहना छोड़ दिया और मैने भीवो सारे शोर जो कभी कमरे और उनसे निकल कर बरामदे में तक पहुँचते थे ,भीतर ही उमड़ने घूमड़ने लगे गुबार बनकरपरखिड़किया खुली नही किसी भी दिवार पे वे बरसे भी पर भीतर हीया किसी अलग कोने में जाकरपानी अलग अलग धाराओं में बह कर दूर निकल ...
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