दरारें बनाती हैं ख्वाब नींद मेंएक लम्स छू गया था कल ख्वाब मेंसुहाने एक मौसम की तरहऔर उसे ढूँढता रहा हूँ मै नींद नींद आज कल कोई और छू जायेगा और कल कोई और तलाश ख्वाब कइ देखे और खोजा भी कि शायद रूबरू हो कभी पर कोई कितना भागे और किसके पीछेख्वाब भी तो ...
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