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एक रिश्ता जो ठहर गया




वो पानी नही ठहरा......

हजार दफा पोंछी आँख
पर
खामोश बहती रही बारिश की नजर मुसलसल

गुबार के काले बादल बरस कर खाली हो गये
पर
सुबकिया थमी नहीं

ना सुबकिया ठहरी और ना वो पानी ठहरा

एक रिश्ता था जो बस ठहर गया था

प्रतिसाद

Re: एक रिश्ता जो ठहर गया
"वो जाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने, तो दूसरा ही लगे." जैसे हमारी ही जिंदगी की एक घटना आपके शब्दों में घटकर और ज्यादा सजीव हो गयी है.
Re: एक रिश्ता जो ठहर गया
"वो जाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने, तो दूसरा ही लगे." जैसे हमारी ही जिंदगी की एक घटना आपके शब्दों में घटकर और ज्यादा सजीव हो गयी है.
अस्वीकरण