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• जानते थे वे नही आयेंगी



वो शाम का किनारा जिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया था
और जिंदगी की सारी लहरें गायब हो गयी थी अचानक धूंधलके में
उसी किनारे पे मेरी ख्वाहिशें ठहर गयी थीं.

पूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया एक छोटे पेट के वास्ते
मुझे याद भी आईं बहुत बार, वो ठहरी हुई ख्वाहिश
और मैं भूला भी बहुत बार.
पर जब कभी जिस्म को फुरसत मिली पेट से
देखा जरूर उस किनारे को
जिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया था
और उन लहरों को जो गुम हो गयी थी अचानक.

ख्वाहिशें तो वहीं ठहरी हैं आज भी
बुलाया भी नही, आवाज़ ही नही दी,
जानते थे वो नही आयेंगी
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान

 प्रतिसाद

Re: जानते थे वे नही आयेंगी
har baar kee tarah mind blowing....