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7 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
वो शाम का किनारा जिसके उस तरफ तुम्हारा समंदर डूब गया था और जिंदगी की सारी लहरें गायब हो गयी थी अचानक धूंधलके में उसी किनारे पे मेरी ख्वाहिशें ठहर गयी थीं. पूरा का पूरा जिस्म झोंक दिया एक छोटे पेट के वास्ते मुझे याद भी आईं बहुत बार, वो ठहरी हुई ख्वाहिश और ... आगे पढ़ें...