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पतझड़ और सीलन




पतझर में जो पत्ते
बिछड़ जाते हैं अपने आशियाने से,
वे पत्ते जाने कहाँ चले जाते हैं
उन सूखे पत्तों की रूहें
उसी आशियाने की दीवारों पे
सीलन की तरह बहती रहती है

किसी भी मौसम में ये दीवारें सूखती नही
ये नम बनी रहती है

मौसम रिश्तों की रूहों को सूखा नही सकते.

प्रतिक्रियाएँ

Re: पतझड़ और सीलन
आज आपने साबित कर दिया कि गुलज़ार की टक्कर का भी कोई हो सकता है, I am really jealous....
अस्वीकरण