Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Take a tour | Family Filter: On
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

6 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (7)
मुद्दत से आरजू है की तेरी चाँदनी में रहूँ. तुम छेड़ो कोई तार की मैं जिसकी रागिनी में रहूँहर तरफ तेरी लिखावट हो और, मैं तो बस सदा उसकी स्याही में रहूँकभी उठे लहर तो गिरे कभी फिर उठने के लिए, मैं हमेशा उसके पानी में रहूँ. खुदा के रहेम-ओ-करम तुम पर मुसलसल ... और पढ़ें...

कुछ गुनगुनी धूप वाले मौसम होते हैं जो पसर जाते हैं जिंदगी की अलगनी पर कुछ इस तरह जैसे कि वे सारा पतझर ढांप लेंगें. तमाम उगे हुए दर्द और सुखी हुई तन्हाईयाँ गिरा कर वो भर देते हैं नंगी शाखों को कोंपलों से.कोयल कूकती है, पपिहे गाते हैंऔर योवन दुबारा पनपने ... और पढ़ें...

कहीं कोई मुककमल मोकां नही है जहाँ में कहीं भी चैन-ओ-आराम नही है. तुमने मसला उठाया है तो कह देता हूँ हम आशिकों से ज़्यादा कोई गुलफाम नही है. जिस साहिल के बदन पे समंदर अंगराईयाँ लेता है उस साहिल की भी कोई खुशनुमा शाम नही है आज फिर उनके जानिब से ना कोई पैगाम ... और पढ़ें...