मुद्दत से आरजू है की तेरी चाँदनी में रहूँ. तुम छेड़ो कोई तार की मैं जिसकी रागिनी में रहूँहर तरफ तेरी लिखावट हो और, मैं तो बस सदा उसकी स्याही में रहूँकभी उठे लहर तो गिरे कभी फिर उठने के लिए, मैं हमेशा उसके पानी में रहूँ. खुदा के रहेम-ओ-करम तुम पर मुसलसल ...
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