कुछ स्वर,जो लब्जों के पनाह में जगह नही पातेउनखामोश स्वरों की रूहें सदियों तक,इंतिज़ार करती हैं की शायद कभी कोई आवाज़,कोई लब्ज उसे अपना जिस्म पहना दे और उन कानों तक पहुँचा देजिनके लिए उन्हे मौन में छोड़ा गया थास्वर मरते नही वे कहीं छूट जाते हैंमौन और लब्ज ...
और पढ़ें...221 views. 4.01 rating from 4 votes.