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28 जनवरी, 2008


ब्लॉग्स (3)
इनकार करती हैं तेरी यादें फींकी पड़ने से .दर्ज करती हैं ये हर रात मेरे ख्वाबों पे अपना बोसा .जिंदा करती हैं खामोशियों को ये लबेन तेरी मेरे लबों पे गुलाब रखती हैं. मैं इस पल में हूँ और ये बीती रैना पर ये ज़्यादा जिंदा हैं .तेरी ठहरी आवाज़ों पे कान रख के ... और पढ़ें...

बातें आती हैं जाती हैं पर खत्म नही होतींढूँढती रहती है अफ़सानों में अपनी जगहखोलती रहती हैं पुरानी सन्दुकेन यादों की पुरानी जंग लगी तहें.बातें दूर तक साथ जाती हैंगर उन्हें किसी नम रसीले गले का सहारा मिल जाता हैगर किसी अहसास के साथ उन्हें किसी अफ़साने में ... और पढ़ें...

उनकी छुअन अब नही लगतीं वे खाली-खाली से रह गये मौसम हैं पेड़ो पे लद भी जाएँ तो शाखें नही झुकतीं वो जो धरती के सबसे नायाब मौसम थे, वो भरे-पुर महकते मौसम फ़िज़ाओं से जाने कैसे गायब होते गये. अब ना तो उनके स्पर्श घुमड़ते हैं आसमान में और, ना हीं उनकी बूंदे ... और पढ़ें...