Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

एक टुकड़ा शब्द


एक टुकड़ा शब्द
लहू-लुहान
तड़फर्ता रहा देर तक
और दम तोड़ दिया आखिर.

सारे आवाज़ एक बार फिर तोड़ दिए थे
फर्श पे पटक के उसने.

सन्नाटा दीवार के कानो पे बर्फ हो गया था
और
जिंदा बचे अल्फाज़ पूरी ताकत से अपनी कंपकंपी संभाल रहे थे.

ऐसा हीं हो जाया करता था अक्सर.

एक दिन अपनी आवाज़ उठा के वो चली गयी
और दीवारों को सन्नाटे में छोड़ दिया

प्रतिक्रियाएँ

Re: एक टुकड़ा शब्द
दिल छू लेने का माद्दा रखती है आपकी कलम.
अस्वीकरण